मुक्तकमा शीत
( संभवत अहिलेसम्मकै सबैभन्दा पहिलो लघुतम मुक्तकहरू )
धर्म
मर्म
केहो
कर्म
सेवा
मेवा
खैत
टेवा
तनै
धनै
भए
मनै
यात्रा
मात्रा
नयाँ
जात्रा
शस्त्र
अस्त्र
खुला
बस्त्र
चेला
भेला
भयो
मेला
देश
भेष
मात्रै
शेष
कलि
बलि
भयो
छलि
नेल
जेल
अहो
भेल
चन्दा
फन्दा
सभ्य
पण्डा
भुवा
कुवा
खेल्ने
जुवा
शुक्ति
जुक्ति
अन्त्य
मुक्ति
बल
फल
ठूलो
दल
लेन
देन
अनि
एेन
भत्ता
लत्ता
मात्रै
सत्ता
मीत
जित
नयाँ
गीत
झोली
बोली
दिदाँ
भोलि
नाम
काम
त्यही
धाम
खाना
नाना
खाली
पाना
रंग
ढंग
एक्लै
दंग
सुन
गुन
शत्रु
खुन
कान्ति
शान्ति
यत्रो
भ्रान्ति
शीत
मीत
कैले
जित
क्रय
त्रय
सबै
जय
२ शीत पुष्प
१२ शीत = १ शीत पुष्प
२४ शीत = २ शीत पुष्प
पुष्कर अथक रेग्मी
पाल्पा