(१)
रेग्मी
गुरु
शीत
सुरू
(२)
रेग्मी
राजा
शीत
ताजा
(३)
शीत
आयो
शान्ती
छायो
(४)
साथी
राम्रा
शीत
हाम्रा
(५)
युद्ध
क्रान्ति
शीत
शान्ती
(६)
कर्म
गरे
हुन्छ
धर्म
(७)
छुद्र
बोली
हुन्छ
गोली
(८)
शीत
भक्ति
मिल्छ
शक्ति
(९)
शीत
सेवा
मिल्छ
मेवा
(१०)
धर्म
यात्रा
सधै
जात्रा
(११)
कल
छल
गर
बल
(१२)
दियो
चोट
लाई
खोट
(१३)
कुरू
क्षेत्र
खुल्यो
नेत्र
(१४)
कर्म
धर्म
भयो
मर्म
(१५)
चार
धाम
मुक्ति
पाम
(१६)
हरे
कृष्ण
हरे
राम
(१७)
शीत
क्षेत्र
काव्य
अस्त्र
(१८)
मन्त्र
पढ
अघि
बढ
(१९)
मन
शान्त
दुख
अन्त
(२०)
दया
पात्र
छैन
शास्त्र
(२१)
धर्म
गरे
बन्छ
कर्म
-शिव कुमार रेग्मी
बगनासकाली-२, पोखराथोक,पाल्पा