शीत – काव्य
देश
हाम्रो
कति
राम्रो!
पुर्व
दिशा
घाम
झुल्क्यो!
हरा
भरा
बाली
मल्क्यो!
आधा
जाडो
आधा
घाम!
छोटा
दिन
लामा
रात!
दु:ख
सुख
दिन
काट!
तीन
थरी
माटो
हाम्रो!
कतै
उवा
आलु
खेती!
जौको
बाको
अन्न
फल्छ!
कतै
तोरी
धान
गहुँ !
कतै
मकै
कोदो
फल्छ!
थरी
थरी
अन्न
साटी!
हामी
खान्छौ
बाडी
चुडी!
जात
जाती
धेर
यहाँ !
भेष
भुषा
थरी
थरी!
जाडो
ठाउ
बाक्लो
लुगा!
गर्मी
ठाउँ
पात्लो
लुगा!
ठिक्क
ठाउँ
दुबै
थरी!
मिली
बस्छौं
वरि
परी !
सुखी
दुखी
आधा
आधी!
ढुङ्गा
भर
माटो
भन्दै!
उप
कार
गरि
कन!
बस्छौं
हामी
सबै
जन!
कमला देवकोटा, पाल्पा