धर्मी
नाम हो
मेरो
धर्मी
साहित्य
कर्मी
काव्य
रच्दछु
भव्य
जन्म
बटौली
ठाम
सोंचे
त्रिशुल
रचें
नैन
त्रिशुल
चैन
देखें
त्रिशुल
भेटें
ढोगें
त्रिशुल
भोगें
काव्य
त्रिशुल
रच्छु
रम्छु
त्रिशुल
लेख्छु
अस्त्र
त्रिशुल
सस्त्र
दिनु
त्रिशुल
चिर्नु
जाग्यो
त्रिशुल
जाग्यो
धर्मी शाक्य, बुटवल ,लुम्बिनी प्रदेश